उत्तर प्रदेश सरकार ने दुग्ध उत्पादन और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल की है, जिसका नाम है “नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना” । इस योजना के माध्यम से पशुपालकों और किसानों को उन्नत नस्ल के गोवंश पालने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है । इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में प्रति पशु दूध उत्पादकता को बढ़ाना और पशुपालकों की आय में वृद्धि करना है । वर्तमान में, उत्तर प्रदेश देश में दुग्ध उत्पादन में पहले स्थान पर है, लेकिन प्रति पशु दूध उत्पादन क्षमता कम है, जबकि पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में यह अधिक है । इस समस्या का समाधान करने और उच्च गुणवत्ता वाले दुधारू पशुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह योजना शुरू की गई है ।
नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना क्या है?
नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना एक सरकारी पहल है जो उत्तर प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए बनाई गई है । यह योजना ‘नन्द बाबा दुग्ध मिशन’ का हिस्सा है, जिसके तहत गौवंशीय पशुओं की नस्ल में सुधार और उनकी दुग्ध उत्पादकता में वृद्धि पर ध्यान दिया जा रहा है । इस योजना के पहले चरण में, 25 दुधारू गायों की 35 इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य है । इन इकाइयों में साहीवाल, गिर, थारपारकर और गंगातीरी जैसी उन्नत नस्ल की गायें शामिल होंगी । इस योजना के तहत, कुल परियोजना लागत का 50% तक अनुदान (सब्सिडी) दिया जाएगा । यह अनुदान तीन अलग-अलग चरणों में प्रदान किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि लाभार्थी योजना के निर्देशों का पालन कर रहा है ।
यह भी पढ़े:– मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना
योजना का उद्देश्य (Objective)
नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता लाना है । इसके निम्नलिखित प्रमुख उद्देश्य हैं:
- प्रदेश में उच्च उत्पादन क्षमता वाले गोवंश का विकास करना ।
- पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता को बढ़ाना ।
- पशुपालकों को उच्च गुणवत्ता वाले गोवंश उपलब्ध कराना ताकि उन्हें बाहर न जाना पड़े ।
- रोजगार के नए अवसर पैदा करना ।
- पशुपालकों की आय को बढ़ाना और उनके जीवन स्तर में सुधार लाना ।
- इस योजना के जरिए सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और पशुपालन के क्षेत्र में नई क्रांति लाई जाए और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो ।
नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना 2025 Overview
योजना का नाम | नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना 2025 |
राज्य | उत्तर प्रदेश |
शुरू की गई | 25 अगस्त, 2023 |
विभाग | दुग्ध विकास अनुभाग-2 |
लाभार्थी | किसान और पशुपालक |
परियोजना लागत | ₹62.50 लाख (विकल्प क) और ₹61.00 लाख (विकल्प ख) |
अनुदान | 50% तक (अधिकतम ₹31.25 लाख या ₹30.50 लाख) |
बैंक ऋण | परियोजना लागत का 35% |
लाभार्थी अंश | परियोजना लागत का 15% |
गाय की नस्लें | साहीवाल, गिर, थारपारकर, और गंगातीरी |
आधिकारिक वेबसाइट | https://nandbabadugdhmission.up.gov.in/Nandani-Krishak-Samridhi-Yojna.php |
नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना 2025 के लाभ
नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना के कई महत्वपूर्ण लाभ हैं जो पशुपालकों और किसानों की मदद करेंगे। इस योजना के तहत, सरकार 25 दुधारू गायों की एक इकाई स्थापित करने के लिए आर्थिक मदद दे रही है । इसमें कुल लागत का 50% तक का अनुदान शामिल है, जिससे लाभार्थी पर वित्तीय बोझ कम होता है । यह अनुदान तीन किस्तों में दिया जाएगा ताकि योजना का सही तरीके से कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके । इस योजना से उच्च नस्ल की गायें उपलब्ध होंगी, जिससे प्रति पशु दूध उत्पादन बढ़ेगा । इससे पशुपालकों की आय में सीधे तौर पर वृद्धि होगी । योजना में साहीवाल, गिर, थारपारकर, और गंगातीरी जैसी नस्लों को शामिल किया गया है, जो अधिक दूध देने के लिए जानी जाती हैं । इसके अलावा, यह योजना गांवों में रोजगार के अवसर भी पैदा करेगी ।
यह भी पढ़े:– मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना
पात्रता (Eligibility Criteria)
- आवेदक उत्तर प्रदेश का स्थानीय निवासी होना चाहिए ।
- गौ-पालन या भैंस-पालन का कम से कम तीन साल का अनुभव होना चाहिए । इसका प्रमाण संबंधित मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा दिया जाना चाहिए ।
- इकाई (यूनिट) स्थापित करने के लिए लगभग 0.5 एकड़ जमीन होनी चाहिए ।
- चारा उत्पादन के लिए कम से कम 1.5 एकड़ जमीन होनी चाहिए ।
- यह भूमि खुद की, पैतृक, साझेदारी में, या न्यूनतम 7 साल के लिए पंजीकृत अनुबंध पर ली गई होनी चाहिए।
- भूमि जल-जमाव से मुक्त होनी चाहिए ।
- आवेदक के पास आधार कार्ड या कोई अन्य पहचान पत्र होना चाहिए ।
- जिन लोगों ने पहले कामधेनु, मिनी कामधेनु या माइक्रो कामधेनु योजना का लाभ लिया है, वे इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे ।
आवश्यक दस्तावेज (Required Documents)
आवेदन के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होगी:
- आधार कार्ड या पहचान पत्र ।
- गौ-पालन या भैंस-पालन के अनुभव का प्रमाण पत्र (मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी) ।
- भूमि स्वामित्व या किरायेदारी का प्रमाण (0.5 एकड़ इकाई के लिए और 1.5 एकड़ चारा उत्पादन के लिए) ।
- बैंक खाते का विवरण ।
- गोवंश बीमा संबंधी दस्तावेज ।
- गोवंश खरीद की रसीद और इयर टैगिंग का प्रमाण ।
नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना 2025 में आवेदन प्रक्रिया
इस योजना के लिए आवेदन ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीकों से किया जा सकता है ।
- आवेदन पत्र जमा करना:
- ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन पत्र भरकर, उसकी हार्ड कॉपी संबंधित जनपद के मुख्य विकास अधिकारी या मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में जमा करनी होगी ।
- चयन प्रक्रिया:
- यदि आवेदनों की संख्या अधिक होती है, तो मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति द्वारा ई-लॉटरी के माध्यम से लाभार्थियों का चयन किया जाएगा ।
- चयन समिति में मुख्य विकास अधिकारी (अध्यक्ष), मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (संयोजक सचिव), लीड बैंक ऑफिसर (सदस्य) और उप दुग्धशाला विकास अधिकारी (सदस्य) शामिल होंगे ।
- सत्यापन और अनुदान:
- चयनित लाभार्थियों की इकाइयों का सत्यापन एक समिति द्वारा किया जाएगा जिसमें उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, पशु चिकित्सा अधिकारी और पशुधन प्रसार अधिकारी शामिल होंगे ।
- सत्यापन के बाद, जनपद स्तरीय समिति अनुदान राशि की मांग नन्द बाबा दुग्ध मिशन के मिशन निदेशक को भेजेगी ।
- अनुदान की राशि मुख्य विकास अधिकारी और मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी के संयुक्त खाते में ट्रांसफर की जाएगी ।
- सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर, यह राशि लाभार्थी के बैंक खाते में तीन चरणों में भेजी जाएगी ।
यह भी पढ़े:– UP Kisan Uday Yojana
योजना की विशेषताएँ (Key Features of the Scheme)
- उच्च नस्ल की गायें: इस योजना में साहीवाल, गिर, थारपारकर और गंगातीरी जैसी उच्च गुणवत्ता वाली नस्लों को शामिल किया गया है ।
- वित्तीय सहायता: योजना में कुल लागत का 50% अनुदान, 35% बैंक ऋण और 15% लाभार्थी का अंशदान शामिल है ।
- तीन चरणों में अनुदान: अनुदान तीन चरणों में दिया जाएगा। पहला चरण आधारभूत संरचना तैयार होने पर, दूसरा गायों की खरीद के बाद, और तीसरा 10 बछड़े पैदा होने के बाद ।
- पारदर्शिता: आवेदन और चयन प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से उपलब्ध है, और आवेदनों की संख्या अधिक होने पर ई-लॉटरी के माध्यम से चयन किया जाएगा ।
- पशुओं की खरीद: गोवंश की खरीद राज्य के बाहर से, उनके ब्रीडिंग ट्रैक्ट से की जाएगी ।
- पशु स्वास्थ्य पर जोर: खरीदे गए सभी गोवंश का बीमा कराना और उनकी इयर टैगिंग अनिवार्य है । साथ ही, उन्हें रोग मुक्त होना चाहिए ।
- भूमि आवश्यकता: योजना के लिए पर्याप्त भूमि, जिसमें इकाई स्थापना और चारा उत्पादन दोनों के लिए जगह शामिल है, अनिवार्य है ।
योजना से जुड़ी नवीनतम अपडेट 2025
नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना को पहले चरण में उत्तर प्रदेश के 10 मंडलों में लागू किया गया है । इनमें अयोध्या, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर, झांसी, मेरठ, आगरा और बरेली शामिल हैं । इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 में 25 दुधारू गायों की 35 इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है । योजना में दो वित्तीय विकल्प उपलब्ध हैं: एक विकल्प में 25 साहीवाल, गिर या थारपारकर नस्ल की गायें शामिल हैं, जिसकी लागत ₹62,50,000 है ।
दूसरा विकल्प 20 साहीवाल, गिर या थारपारकर और अधिकतम 5 गंगातीरी नस्ल की गायों के लिए है, जिसकी लागत ₹61,00,000 है । अनुदान राशि भी इसी आधार पर निर्धारित की गई है, जो क्रमशः ₹31,25,000 और ₹30,50,000 है । योजना का क्रियान्वयन दुग्ध आयुक्त, जिलाधिकारी और पशुपालन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है ताकि सुचारू रूप से कार्य हो सके ।
संपर्क विवरण (Contact Details)
योजना से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए, आवेदक अपने जनपद के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी या उप दुग्धशाला विकास अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं ।
Dial:- 0522-3128643
Email:- info[at]nandbabadugdhmission[dot]up[dot]gov[dot]in
FAQs
नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना में कौन सी नस्ल की गायें शामिल हैं?
इस योजना में साहीवाल, गिर, थारपारकर और गंगातीरी नस्ल की गायें शामिल हैं। गंगातीरी नस्ल की अधिकतम 5 गायें प्रति इकाई अनुमन्य हैं ।
योजना के तहत कितना अनुदान मिलेगा?
परियोजना की कुल लागत का 50% तक अनुदान दिया जाएगा, जो अधिकतम ₹31,25,000 (25 गायों के लिए) या ₹30,50,000 (20+5 गायों के लिए) हो सकता है ।
अनुदान कितने चरणों में मिलेगा?
अनुदान तीन चरणों में दिया जाएगा:
- पहला चरण: आधारभूत संरचना के सत्यापन के बाद, परियोजना लागत का 25% ।
- दूसरा चरण: 25 दुधारू गोवंश की खरीद के बाद, परियोजना लागत का 12.5% ।
- तीसरा चरण: 10 बछड़े पैदा होने के बाद, परियोजना लागत का 12.5% ।
आवेदन कैसे करें?
आप ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की हार्ड कॉपी संबंधित जनपद के मुख्य विकास अधिकारी या मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में जमा करनी होगी।
क्या पहले से किसी अन्य योजना के लाभार्थी इस योजना के लिए पात्र हैं?
नहीं, जो लाभार्थी पहले से कामधेनु, मिनी कामधेनु या माइक्रो कामधेनु योजना का लाभ उठा चुके हैं, वे इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं ।